प्राचीन भारतीय कथा

सम्राट अशोक

प्राचीन भारतीय कथा

अध्याय 6

तुंगर "योद्धा

भारत, 262 इई.पू.

में महान राजा अशोक का एक योद्धा था, लेकिन मैं कोई साधारण योद्धा नहीं था. मैं दुनिया का सबसे महान योद्धा बनने की राह पर था!

में सिर्फ एक लड़का था. लेकिन सम्राट अशोक ने अपनी सेना के कई अन्य योद्धाओं के बीच मुझे देखा और चुना.

सम्राट अशोक हर दिन हमारी फौज की कतारों में से गुजरते थे. वो हमारा निरीक्षण करते थे. वह अक्सर मुझ से बात करते थे. आज का दिन कोई बहुत अलग नहीं था.

"तुंगर," सम्राट अशोक ने मुझे ऊपर-नीचे देखते हुए कहा. "तुम निडर और साहसी लगते हो. तुम में एक महान योद्धा बनने की योग्यता है."

दूसरे युवा योद्धाओं ने मुझे ईर्ष्या से देखा. मैंने क्या किया था? मैं राज्य का सबसे अच्छा योद्धा था. वे कभी भी मेरी महानता की बराबरी नहीं कर सकते थे.

"मैं आपके लिए ज़रूर लड़ृंगा, सम्राट," मैंने सम्राट अशोक से कहा.

लेकिन मुझे पता था कि यह सच नहीं था. मैं सम्राट अशोक के लिए लड़ाई नहीं लड़ता. मैं खुद के गौरव के लिए लड़ता. मेरा सबसे बड़ा सपना था - मगध राज्य में सबसे कम उम्र का जनरल (सेनापति) 6 बनना.

सम्राट अशोक के जाने के बाद, एक युवा योद्धा नंदी

मेरे पास आया. " सम्राट अशोक का ध्यान आकषित करने के लिए तुमने क्या किया?" उसने पूछा.

नंदी मुझे प्रशंसा की निगाह से देखता था और अक्सर मेरे पीछे-पीछे चलता था. वो भी मेरे जैसा ही बनना चाहता था, लेकिन शायद वो संभव नहीं था.

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मैं उसे अपनी कहानी बताऊंगा. लेकिन उससे पहले, मैं अपनी तलवार सीधा करके अपनी सोने की बेल्ट को कसता था. मैंने अपनी ठाल में अपने चेहरे को निहारता था. मैं खुद को एक सुंदर, साहसी लड़के जैसा देखता था. कई अन्य लड़के मेरे पास इकड्ठे हो जाते थे. वे अचरज करते थे कि में क्या कर रहा हूं

"ठीक है?" नंदी ने हठ किया. "हमें यह बताओ कि सम्राट अशोक ने तुम्हें युद्ध में अपने बगल में सवारी करने के लिए क्यों चुना? हमें वो कहानी सुनाओ!"

में उसे अपनी कहानी सुनाता था. सच में वो एक अद्भुत कहानी थी, भत्रे ही उसके कुछ हिस्से झूठे थे.

"मैंने कई बार सम्राट अशोक को मौत से बचाया," मैंने शुरू किया. "एक बार वो अकेले पेड़ों के बीच में से जा रहे थे. वो गहरे सोच में डूबे थे. उन्होंने बाघ को उछलते हुए नहीं देखा. लेकिन मैंने उस बाघ को देखा. मैंने तुरंत अपना भाला उठाया ..."

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मैं कछ देर रुका. क्या वो तीर था? मैंने वो कहानी कई बार सुनाई थी, लेकिन में शायद उसके कुछ अंश भूल गया था.

मेरे साथी कहानी खत्म होने का इंतजार कर रहे थे. एक लड़के वेद, ने अधीरता से अपना पैर हिलाया.

"तुंगर!" राजा अशोक ने बीच में टोकते हुए कहा. "में अपने फौजी जनरलों से मिलने जा रहा हूं में चाहता हूं कि तुम भी मेरे साथ चलो. तुम एक स्मार्ट लड़के हो. तुम मेरी कुछ मदद कर सकते हो."

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"में एक लड़का नहीं हूं. में एक योद्धा हूं!" मैंने अपनी ठुडडी को गर्व से ऊपर उठाया. दूसरे लड़के हैरान थे. उनमें से किसी में भी महान अशोक से बात करने की हिम्मत तक नहीं थी.

सम्राट अशोक कुछ नाराज़ हा ठीक है योद्धा." उन्होंने अपनी नाराजगी जताई, लेकिन में चिंतित नहीं हुआ. में उसके पीछे-पीछे उनके तम्बू में गया.

"में एक ओर युद्ध लड़ने जा रहा हूं," सम्राट अशोक ने फौजी जनरलों से कहा. "हम कलिंग पर विजय हासिल करेंगे."

इससे फोजी जनरल हैरत में पड़ गए. "लेकिन कलिंग एक बहुत शक्तिशाली राज्य है! उस पर आक्रमण में बहुत से ल्रोग मारे जाएंगे," जनरल तालिक ने अपनी चिंता जताई.

सम्राट अशोक उन पर झिड़का. "जो कोई भी मेरा साथ नहीं देगा, उसे हाथियों को खिला दिया जाएगा!"

"लेकिन सम्राट अशोक, हाथी शाकाहारी होते हैं, वे मांस नहीं खाते हैं!" तालिक ने जवाब दिया. मैंने अपनी तलवार पर अपना हाथ रखा और तालिक को घूरा.

"क्या में उन्हें मार डालूं या फिर उसे हाथियों के पास ले जाऊं, महाराज?" मैंने पूछा.

जनरल तालिक हंस पड़े.

"शांत!" सम्राट अशोक चिललाए. "कल हम कलिंग के लिए रवाना होंगे."

"महाराज, में आपके साथ जाऊंगा," मैंने कहा. "मैं निडर और बहादुर हूँ!"

मैंने जनरलों की हंसी को नजरअंदाज करने की कोशिश की. उन्हें लगा कि मैं सिर्फ एक लड़का हूं, लेकिन वो उनकी गलतफहमी थी. वे जल्द ही देखेंगे. जल्द ही में उन्हें दिखा दूंगा कि मैं उन सभी से महान जनरल हूँ

अध्याय दो

हमारी सेना दक्षिण के रास्ते कलिंग की ओर चली. हमारी सेना के घोड़ों के खुरों से जमीन हिलने लगी.

सम्राट अशोक सेना के आगे एक हाथी पर सवार थे.

दूसरे युवा योद्धा एकदम पीछे थे, लेकिन मैं सम्राट अशोक के बिल्कुल पास था. वेद की ईर्ष्या भरी आँखें और नंदी की निहारती आँखें मेरी पीठ को घूर रही थीं.

"हमें अन्य राज्यों से क्यों लड़ना चाहिए?" जनरल तालिक ने पूछा.

"मेरे दादा, चंद्रगुप्त, ने कई अन्य राज्यों को जीता था और मैं भी वैसा ही करूंगा!" सम्राट अशोक ने उत्तर दिया.

चंद्रगुप्त मगध के सबसे बड़े सम्राट थे," मैंने कहा.

"वो मुझे पता है!" जनरल तालिक ने कहा. "एक छोटे लड़के को मुझे वो ज्ञान देने की ज़रूरत नाता

लेकिन मुझे लग रहा था कि वो झूठ बोल रहे थे. भले ही मैं एक छोटा लड़का था, फिर भी मैं तालिक से ज्यादा जानता था. और मैं बड़ा होकर उनसे कहीं ज्यादा बेहतर जनरल बनूंगा.

"वो लड़का बहुत कुछ जानता है," जनरल तालिक ने हंसते हुए कहा. " वो लड़का आपको कहाँ मिला सम्राट अशोक?"

"एक समझदार बच्चे को लड़ाई में ले जाना अच्छा होगा," सम्राट अशोक ने कहा. "मेरे दादाजी ने एक बार कहा था कि उनके युवा सैनिकों ने उन्हें कई राज्य जीतने में मदद की थी."

"आपको अपनी तुलना चंद्रगुप्त से नहीं करनी चाहिए," मैंने सम्राट अशोक से कहा. "आप उनसे कहीं बेहतर राजा हैं!"

मुझे लगा कि मैंने सम्राट की तारीफ की थी. लेकिन

सम्राट अशोक प्रसन्न नहीं दिखे. "तुंगर, मेरे दादाजी के बारे में बोलते समय पहले ज़रा सोचा करो."

"मुझे माफ़ करें, सम्राट अशोक."

फिर सम्राट अशोक ने पीछे घूमकर देखा. "तुम्हारे मित्र वेद और नंदी कहाँ हैं? उन्हें मेरे पास लाओ."

"वे मेरे दोस्त नहीं हैं. और वे लड़के आपके लायक नहीं हैं."

"जैसा मैं तुमसे कहूं वैसा ही करो!" सम्राट अशोक

चिल्लाए.

मेरे पास कोई विकल्‍प नही था. यदि मैं एक जनरल बनना चाहता था, तो मुझे सबसे पहले आज्ञा पालन करना सीखना होगा.

रास्ते में, हमें देखने के लिए तमाम गांववासी इकट्ठा हुए थे. मैंने उनकी ओर हाथ लहराया.

एक छोटा लड़का और उसके पिता अन्य ग्रामीणों से कुछ दूर खड़े थे.

मैंने जल्दी से उनसे अपने निगाह हटा ली. वो लड़का और उसका पिता अछूत थे, यानि वे बहिष्कृत थे.

मैं हिंदू धर्म का पालन करता था. हिन्दुओं का मानना है कि लोग जातियों, या वर्गों में पैदा होते हैं.

वर्ण व्यवस्था में अछूत इतने नीचे थे कि उनकी कोई जाति नहीं थी. उन्हें छूने या देखने भर से आप अशुद्ध हो सकते थे.

में कांपने लगा. काश मैंने उन्हें नहीं देखा होता.

वे मेरी किस्मत खराब कर सकते थे.

मैं वेद और नंदी के पास गया. "सम्राट अशोक चाहते हैं कि आप उनसे जुड़ें," मैंने अनिच्छा से कहा.

वेद ने मुझे ऐसे देखा जैसे वो अशोक के बुलावे की उम्मीद ही कर रहा था. लेकिन नंदी इतना हैरान हुआ कि वो गिरते-गिरते बचा.

हमारे पास आते ही सम्राट अशोक ने हमारी ओर रुख किया. "वेद, क्या तुम लड़ाई से डरते हो?“

वेद ने अपनी छाती फुलाई. "नहीं," उसने जवाब दिया."तुंगर, क्या तुम लड़ाई से डरते हो?“

मैंने भी अपना सीना फुलाया और वेद से ऊंचा खड़ा होकर कहा, "नहीं."

"नंदी, क्या तुम लड़ाई से डरते हो?" नंदी ने हमें देखा और फिर अशोक की ओर देखा. फिर उसने अपनी आँखें नीची कर लीं.

"हाँ," उसने स्वीकार किया.

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सम्राट अशोक मुस्कुराए और उसने नंदी को पीठ पर थपथपाया. "बहुत अच्छी बात! डर, एक सच्चे योद्धा की निशानी है. नंदी तुम मेरे साथ युद्ध में चलना."

"लेकिन आपने तो कहा कि एक योद्धा को निडर होना चाहिए!" में गिड़गिड़ाया.

"मैंने अपना मन बदला है. अब तुंगर और वेद, तुम दोनों वापस दूसरे लड़कों के पास जाओ."

जब हम वापस लौटे, तो दूसरे युवा सैनिकों ने हमारा मज़ाक उड़ाया. "बैचारा तुंगर. अब वो सम्राट अशोक का छोटा जनरल नहीं रहा!"

मैंने उनकी उपेक्षा की. वे हमेशा जैसे ही ईष्या कर रहे थे. एक दिन मैं जनरल ज़रूर बनूंगा. तब उन्हें मेरी बात माननी पड़ेगी.

लेकिन अब मैं गुस्से और उलझन में था. सम्राट अशोक ने अपना मन क्यों बदला?

अछूत! क्या वो सच था. क्या वे मेरे दुभाग्य का कारण थे.

अध्याय युद्ध में खतरा

कई दिनों के बाद हम कलिंग पहुँचे. उनके सैनिक हमारे लिए पहले से तैयार थे. उन्होंने कड़ी मेहनत की, और युद्ध कई हफ्तों तक चला. कलिंग में आने के बाद से मैंने सम्राट अशोक या नंदी को नहीं देखा. सम्राट अशोक ने मुझे बहादुरी से लड़ते हुए भी नहीं देखा था.

"तुमने बहादुरी के क्या-क्या काम किए?" एक रात वेद ने मुझसे पूछा. लड़ाई अब धीमी हो गई थी, और हम लोग अपने शिविर में आराम कर रहे थे.

मैंने क्या किया? मैंने तेजी से सोचा. "मैंने कलिंग के दो सैनिकों को एक-दूसरे से लड़वाया," मैंने कहा. "वे दोनों मेरी ओर लपके. लेकिन मैं झट से हट गया, और फिर उनकी तलवारें एक-दूसरे से जाकर टकराई."

"फिर क्‍या हुआ?" एक लड़के ने पूछा.

में कहानियां गठने में काफी माहिर था. लेकिन आगे मुझे कुछ समझ में नहीं आया.

"मुझे नहीं पता. में भाग गया," मैंने कहा.

"तुम भाग गए?" वेद से पूछा. "एक जनरल कभी भागता नहीं है."

अगले दिन, बहुत तेज़ बारिश हुई. लड़ाई धीमी हो गई.

में खुद को थका हुआ महसूस कर रहा था. मुझे युद्ध के मैदान से दूर एक शांत झाड़ी मिली. मैंने अपनी ढाल से सिर ठंका और फिर सो गया. लेकिन जल्द ही में

चिललाकर जाग उठा.

"मदद करो!" आवाज जानी-पहचानी थी. "नंदी!" में उछलते हुए चिल्लाया. मैंने उसे पास की पहाड़ी पर मुंह के बल पड़े हुए देखा. फिसलन और कीचड़ उसे चट्टान के किनारे की ओर खींच रही थी. "नंदी! उठो!" मैं चिललाया.

29

"में नहीं उठ सकता," उसने कहा.

उसकी तरफ दौड़ते हुए मैंने देखा कि वो क्यों हिल नहीं सकता था. वो एक छोटे लड़के का हाथ पकड़े हुए था. वो बच्चा चट्टान की कगार से नीचे लटका था.

3० ५५

लड़का अपने पैर फड़फड़ा रहा था. वो हमें भयभीत निगाहों से देख रहा था.

उसका चेहरा मुझे परिचित लगा. मैंने उसे पहले कहाँ देखा था?

"हमारी मदद करो, तुंगर!" नंदी ने विनती की. "तुम बहादुर और ताकतवर हो."

में दौड़ता हुआ नंदी के पास गया. नंदी ने लड़के का एक हाथ पकड़ा ओर मैंने उसका दूसरा हाथ पकड़ा. हमने मिलकर उसे ऊपर खींचा.

मेरे हाथ कीचड़ और बारिश से सन गए थे. मुझे लगा कि छोटा लड़का फिसलकर नीचे गिर जाएगा. लेकिन मैंने अपनी सारी ताकत लगाई. अंत में लड़का ऊपर आया.

उसने खड़े होकर अपना मैल्रा चेहरा पोंछा.

"धन्यवाद," उसने वहां से भागते हुए कहा.

"रुको!" मैंने कहा.

नंदी ने मेरी बांह खींची. "तुमने वो सुना?" वो पीछे की ओर देखकर फुसफुसाया.

हमारे पीछे झाड़ियों में से सरसराहट की आवाज रही थी. मैंने मुढ़कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था.

"वहां सिर्फ बारिश है," मेंने कहा. और फिर मैं वापस $ आप को लड़के की ओर मुड़ा.

नंदी ने फिर से मेरी बांह पर हाथ फेरा. "चलो चलते हैं." ऐसा लगा जैसे नंदी उस लड़के के पास नहीं रहना चाहता था.

अचानक मुझे याद आया कि मैंने उस बच्चे को कहाँ देखा था. सेना के गुजरने के समय वो सड़क के पास खड़ा था. उसने हमारा पीछा करने का फैसला किया होगा.

वो एक अछूत था. समाज से बहिष्कृत. क्योंकि मेंने उसे छुआ, इसलिए मैं अब हमेशा के लिए अशुद्ध रहूंगा.

अध्याय 4 जलता हुआ शहर

"तुम्हें पता था!" शिविर की ओर वापस जाते हुए मैंने नंदी पर आरोप त्रगाया.

नंदी ने सर हिलाया. "मैं उसे गिरने नहीं दे सकता था. वो सिर्फ एक छोटा सा लड़का था.”

"पर वो एक अछूत था!"

नंदी ने तर्क दिया, "उसमें उसकी क्या गलती कि वो अछूत पैदा हुआ."

"अछूत लोग इसलिए समाज से बहिष्कृत होते हैं क्योंकि उन्होंने अपने पिछले जनम में कुछ बुरा किया होगा. वे गंदे होते हैं. और अब हम भी गंदे हैं!"

फिर हम शिविर में पहुंचे. हम देख सकते थे कि पूरा कलिंग शहर जल रहा था. सब तरफ धुआं उठ रहा था. हवा में चीखने-चिललाने की आवाज़ें थीं. कलिंग ने आत्मसमर्पण कर दिया था.

जब हम शिविर में पहुँचे तो वेद मुस्करा रहा था.

लेकिन वो कलिंग जीतने की से खुश नहीं था. उसकी आँखों को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वो कुछ जानता था. झाड़ी वाली आवाज! क्या वेद ने हमें उस अछूत के साथ देखा था?

जब हम उसके पास से गुजरे, तो वो पीछे की ओर कूद गया, जैसे वो हमें छूने से बचना चाहता हो.

"तुंगर," वेद ने कहा. "तुम बहुत बहादुर और इतने सुंदर हुआ करते थे. तुम सम्राट अशोक के महान जनरल होने जा रहे थे. लेकिन अब तुम अशुद्ध

मैंने उसकी तरफ देखा. "मुझे नहीं पता कि तुम किस बारे में बात कर रहे हो," मैंने झूठ बोला. "और तुम कभी भी जनरल नहीं बनोगे क्योंकि तुमने कुछ भी असाधारण नहीं किया है."

"कम-से-कम मैंने कुछ गलत तो नहीं किया मुझे बड़ा अभिमान महसूस हुआ. सम्राट अशोक

है," वेद ने कहा. और हमारी बहादुर सेना के कारण हमने कलिंग पर मैंने नंदी चिंतित नहीं विजय प्राप्त की थी.

मैंने नंदी पर एक नज़र डाली, जो चिंतित नहीं लग रहा था. लेकिन वो मगध के सबसे कम उम्र फिर मुझे अपने पीछे एक आवाज़ सुनाई दी. वाला जनरल भी नहीं बनना चाहता था. नंदी मेरे पीछे था. जलते शहर को देखकर उसकी

आँखों से आंस बह रहे थे.

फिर मैं पहाड़ी के किनारे पर गया और मैंने कक हि हज नीचे जलते हुए शहर को देखा. दुश्मन के हजारों "मूर्ख नंदी!" मैंने डांटा. "हमने अपना मिशन सैनिक मारे गए थे. हजारों लोगों को कैदियों के रूप पूरा किया है. हमने कलिंग को जीता है. फिर तुम में दूर ले जाया जा रहा था. क्यों रो रहे हो?"

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"मेरी आँखों में धुआँ घुस गया है," उसने अपना चेहरा घुमाते हुए कहा.

काश सम्राट अशोक उसे इस समय देखते! तब उन्हें पता चलता कि उनके साथ किसे सवारी करनी चाहिए. फिर उन्हें मालूम पड़ता कि कौन जनरल बनने के काबिल था. कम-से-कम वो रोन्टू नंदी तो नहीं.

नीचे, सम्राट अशोक नष्ट हुए शहर में घूम रहे थे.

उन्होंने अपने चारों ओर जलती हुई इमारतों को देखा.

में पहाड़ी से नीचे उतरकर सम्राट अशोक के पास पहुंचा. नंदी मेरे पीछे-पीछे था. एक वफादार छोटे

पिल्‍ले की तरह! "भागो!" मैंने उससे कहा, लेकिन वो

मेरे पीछे पहाड़ी के नीचे उतरता रहा.

फिर में सम्राट अशोक के पास पहुंचा. "सम्राट अशोक, क्या आपने देखा? हमने कलिंग को जीत लिया है!"

सम्राट अशोक एकदम चुप थे. उन्होंने धू-धू जलती इमारतों को देखा और उन्होंने वहां पर लोगों, पतियों और बेटों के मरते हुए देखा.

उन्होंने पूरे शहर का मुआयना किया. उनकी आंखों में शहर का धुआं और विनाश झलक रहा था.

"यह मैने क्या किया?" सम्राट अशोक ने फसफसाया. ब् ब्

"अब आप और भी बड़े राजा बने हैं!" मैंने कहा.

अध्याय 5 सच ओर झूठ

"अब हमें सम्राट अशोक से बात नहीं करनी चाहिए," नंदी फुसफुसाया. "क्योंकि हम अशुद्ध हैं."

"अछूत होना भी मुझे सम्राट अशोक के अयोग्य नहीं बना सकता," मैंने कहा.

लेकिन मुझे अपने कहे पर यकीन नहीं हो रहा था. जब हम पहाड़ी पर वापस चढ़े, तब मैंने देखा कि वेद हमें घूर रहा था.

"हमें अपनी लड़ाई की कहानियां सुनाओ, तुंगर," वेद ने कहा. उसकी आंखें चमक उठीं. "अपनी बहादुरी का कोई करतब सुनाओ?"

मुझे सिर्फ वही किस्सा याद आया जब मैंने नंदी और उस छोटे लड़के की जान बचाई थी. क्या में बहादुर नहीं था? भले ही अछूत मेरी मदद के उनकी आवाज ध्वस्त शहर के बीच से गूँजती रही. काबिल नहीं था, लेकिन मेरी वजह से वो ज़िंदा तो

अब मेरे पास कुछ भी कहने को नहीं था. बचा.

सम्राट अशोक ने अपना सिर हिलाया. उसकी आंखें दुख से झुक गडं. फिर उन्होंने हाथों से अपने सिर को पकड़ा.

"मैने यह क्या किया?" वो चिल्लाए.

"मैंने सम्राट अशोक को भी बचाया ... !" मैंने घमंड से कहा. इससे पहले कि मैं उन्हें रोक पाता, शब्द मेरे मुंह से निकल गए. "वो कीचड़ में फेस गए थे, एक चट्टान की कगार पर और नीचे की ओर फिसल रहे थे."

"और फिर मैं उसकी मदद करने के लिए दौड़ा!" नंदी ने टोकते हुए कहा. "लेकिन में भी कीचड़ में फिसल गया. बस तभी तुंगर दिखाई दिया." नंदी ने मेरी ओर देखा. वो मेरी तारीफ करने की कोशिश कर रहा था.

मुझे यकीन नहीं हुआ. ईमानदार नंदी. अब वो भी मेरी तरह ही लेटा हुआ था.

यह मैने क्या किया? सम्राट अशोक के यह शब्द मेरे दिमाग में लगातार गूँज रहे थे.

"मैंने उन दोनों को कीचड़ से बाहर निकाला. यह कहानी का अंत है," मैंने कहा.

"क्या आप पक्की तौर पर कह सकते हैं कि आपने सम्राट अशोक को बचाया था?" वेद ने पूछा.

"मैं अपने राजा को भला कैसे भूल सकता था? उन्हीं के लिए ही तो मैं जीता हूं."

वेद ने अपना सिर हिलाया. "तुमने अपना पूरा जीवन सम्राट अशोक के लिए जिया है. फिर तुम अपने दोस्तों के साथ बुरा व्यवहार करते हो?" वेद ने नंदी की ओर इशारा किया.

"मेरा कोई दोस्त नहीं हैं!" मैंने कहा. "मेरा केवल एक छोटा पिल्‍ला है जो हर समय मेरे पीछे-पीछे चलता है." मैंने नंदी को लगी चोट को नजरअंदाज करने की कोशिश की.

कलिंग को हराने के बाद सम्राट अशोक अब पुराने अशोक नहीं रहे हैं. हम मगध में महल में लौटे, लेकिन सम्राट अशोक ने वहां कोई दावत नहीं दी.

उसकी बजाए उन्होंने बौद्ध पुजारियों को इकट्ठा किया. वे पुजारी शांति के पाठ, पढ़ाने के लिए जाने जाते थे. उन्होंने सम्राट अशोक के साथ कई दिन अकेले बिताए.

फिर एक दिन सम्राट अशोक ने अपने सैनिकों की बैठक बुलाई. क्योंकि सैनिक बहुत सारे थे, इसलिए हम सब महल के बाहर एक छोटी पहाड़ी के नीचे मिले. मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा.

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शायद आज सम्राट अशोक मुझे मगध का सबसे युवा जनरल नियुक्त करेंगे!

"सैनिकों, आपने बड़ी वफादारी और साहस से काम किया है," सम्राट अशोक ने शुरू किया. "लेकिन अब मुझे किसी सेना की जरूरत ही नहीं है."

सैनिकों ने आपस में कुछ गुफ्तगू की. जनरल तालिक, सम्राट अशोक को देखते रह गए.

"अब हम कोई और राज्य नहीं जीतेंगे," सम्राट अशोक ने कहा, "इसकी बजाए, आपको पेड़ों और फलों के बाग लगाने के काम में लगाया जाएगा. आप लोग अब से कुएं और सड़कें बनाएंगे."

कुआँ खोदना या पेड़ लगाना कोई बड़ी इज़्ज़त और शोभा की बात नहीं थी?

सम्राट अशोक ने कहा, "अब से, में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करूंगा. मैं सभी लोगों के लिए - यहां तक कि निचली जाति के लोगों की भलाई के लिए भी काम करूंगा."

सेना के लोग यह सुनकर बहुत गुस्सा हुए.

सम्राट अशोक ने उन्हें चुप कराने के लिए अपना हाथ उठाया. "कलिंग में मारे गए लोगों का मुझे गहरा गहरा अफसोस है. मेरी वजह से ही वो लोग मारे गए."

में सम्राट अशोक के पास गया. “इस महान कविता में एक कहानी है," मैंने कहा.

सम्राट अशोक गुस्सा हए लेकिन मैंने अपनी बात ज़ारी रखी. "कविता में, एक योद्धा लड़ाई में मानव जीवन की तबाही के लिए खुद को बुरा महसूस करता है. तब एक देवता उस योद्धा के पास आता है और उससे कहता है कि वो एक योद्धा बनने के लिए ही पैदा हुआ था."

"उसे बिना किसी पछतावे के एक योद्धा का जीवन जीना चाहिए. इसकी सीख यह है कि हम वो जीवन स्वीकारें जिसमें हम पैदा हुए हो!

सम्राट अशोक ने कुछ नहीं कहा.

"आप देख रहे हैं. आप एक योद्धा हैं! आपको यह बात स्वीकार करनी होगी," मैंने कहा.

सम्राट अशोक ने अपना सिर हिलाया. "इस कविता में कई बेहतरीन सबक हैं. लेकिन मैंने खुद एक सबक सीखा है. मेरे कारण लोगों को मरना नहीं चाहिए."

सम्राट अशोक क्या सोच रहे थे? यदि उन्होंने अन्य राज्यों को जीतना जारी नहीं रखा, तो उन्हें एक महान राजा के रूप में भुला दिया जाएगा.

और फिर मैं भी कभी महान नहीं बनूंगा.

अध्याय 6 नंदी का इनाम

मुझे बगल में झाड़ियों में शोर सुनाई दिया. पत्तों के बीच से एक चेहरा मुझे देख रहा था. अछूत! मैं घृणा से भर गया.

और फिर मैं वेद के मुस्कुराते चेहरे को घूर रहा था.

"क्या आपको अपना दोस्त मिला?" उसने पूछा.

उसने छोटे अछूत लड़के की ओर इशारा किया.

दूसरे सैनिकों ने लम्बी सांस भरी. सम्राट अशोक के चेहरे का भाव नहीं बदला.

"मैंने तुंगर और नंदी को एक छोटे लड़के को चट्टान पर गिरने से बचाते हुए देखा. पर वो छोटा लड़का एक अछूत था," वेद ने समझाया.

कै सम्राट अशोक गुस्से में हमारी ओर आए.

' > 4 हर नंदी मेरे पीछे छिप गया. लेकिन में एक जनरल की तरह ऊंचा और सीधा खड़ा रहा. मैंने वही किया जो मैं हमेशा मुसीबत के समय करता हूं. मैंने अपनी ढाल उठाई और अपने चेहरे को देखा. लेकिन अब मुझे एक सुंदर, बहादुर लड़का नहीं दिखा. मुझे उसमें एक झूठा और स्वार्थी लड़का दिखा.

"सम्राट अशोक!" वेद ने कहा. "मुझे लगता है कि तुंगर आपसे कुछ कहना चाहता है."

जब मैंने कुछ नहीं कहा, तो वेद ने अपनी बात जारी रखी. "तुंगर एक जनरल बनने योग्य नहीं है. वो अशुद्ध है. उसने एक अछूत लड़के को छुआ है!"

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"यह रहा वो अछूत लड़का," वेद ने बिना देखे उस लड़के ओर इशारा किया.

सम्राट अशोक ने लड़के की ओर देखा. "झाड़ी के नीचे से बाहर आओ," उन्होंने आदेश दिया.

छोटा लड़का झाड़ी में से रेंगता हुआ बाहर निकला.

उसके बाल पत्तों से ढैके हुए थे, और उसका चेहरा गंदा था. "क्या यह कहानी सच है?" सम्राट अशोक ने पूछा.

56

लड़के ने सम्राट अशोक की तरफ नहीं देखा. उसे पता था कि उच्च जातियों के लोगों से बात करना गलत था.

सम्राट अशोक, लड़के की बगल में घुटनों के बल बैठ गए और उन्होंने उसके कंधे को छुआ. जनरल तालिक, सम्राट अशोक को रोकने के लिए दौड़े. लेकिन सम्राट अशोक ने जनरल को दूर हटा दिया. "मैं बौद्ध हूँ. जातियां अब मेरे लिए कोई मायने नहीं रखती हैं."

फिर सम्राट अशोक वापस लड़के की ओर मुड़े. "क्या यह सच है?" उन्होंने पूछा.

छोटे लड़के ने "हाँ" में सिर हिलाया. सम्राट अशोक ने लड़के का सिर थपथपाया. फिर वो मेरी तरफ मुड़े.

"मुझे उसके अछूत होने का नहीं पता था!" मैंने समझाया.

सम्राट अशोक ने नंदी को देखा. "क्या तुम्हें पता था?"

नंदी ने सिर हिलाया. "हाँ, मुझे पता था. लेकिन मैं उसे मरने नहीं दे सकता था."

सम्राट अशोक मुस्कुराए. "नंदी वास्तव में बहादुर हैं. वह सच में एक हीरो है."

मुझे बहुत गुस्सा आया. " और मेरा क्या? मैंने ही उन दोनों को बचाया!"

"और मेरा क्या?" वेद ने जोड़ा. "क्या मैं सच बोलने के लिए पुरस्कार के लायक नहीं हू?"

"तुमने सच कहा," सम्राट अशोक ने कहा. "लेकिन तुमने गलत कारण से सच बोला."

फिर सम्राट अशोक ने मेरी तरफ देखा. "हाँ, तुंगर तुमने उन्हें बचाया. और कभी-कभी अच्छा काम खुद मे अपना पुरुस्कार होता है." फिर सम्राट अशोक मुड़कर नंदी को अपने साथ ले गया.

नंदी ने मुझे पीछे देखा. "तुम हमेशा मेरी नज़र में एक जनरल रहोगे तुंगर. और हम-तुम हमेशा दोस्त बने रहेंगे."

नंदी अब मेरा पिल्‍ला नहीं था.

उसे देखकर मैं मुस्कुराया. अचानक हमने अपनी जगह बदल ली थीं. कभी वो मुझे निहारता था. अब में प्रशंसा से उसे घूर रहा था.

"हाँ, हम हमेशा दोस्त बने रहेंगे." और मुझे पता था कि यह सच था.

मुझे नंदी से बहुत कुछ सीखना था. शायद किसी दिन मैं जनरल बनने लायक पर्याप्त सबक सीखूगा.

प्राचीन भारतीय धर्म

हिंदू धर्म प्राचीन भारत का प्रमुख धर्म था. हिंदू लोग जाति व्यवस्था में विश्वास करते थे. धन, शक्ति और व्यवसाय के आधार पर चार जातियाँ या वर्ग थे. प्रत्येक जाति के पास जीवन जीने के लिए नियम- कानून थे. प्राचीन हिंदू लोग कई देवताओं में भी विश्वास करते थे.

बौद्ध धर्म की शुरुआत प्राचीन भारत में लगभग 500 इ.पू. गौतम बुद्ध नामक एक युवा राजकुमार से हुई. गौतम बुद्ध ने मानव दुख का हल खोजने के लिए अपना शाही घर छोड़ दिया. बुद्ध ने पाया कि इच्छाएं ही मानव दुख का कारण थीं. सभी इच्छाओं को छोड़कर खुशी पाई जा सकती थी. बुद्ध की शिक्षा का पालन करने वाले लोगों ने सभी जीवित प्राणियों के लिए शांति और सम्मान का अभ्यास किया.

प्राचीन भारत में बौद्ध धर्म धीरे-धीरे करके फैलता गया. सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने के बाद, उन्होंने पूरे भारत में मिशनरी दूतों को भेजा. इन मिशनरियों ने बौद्ध धर्म का संदेश फैलाया. इन मिशनरियों को चीन और अन्य एशियाई राज्यों में भी भेजा गया.

बहुत से लोग बौद्ध धर्म का पालन करने लगे. हिंदू धर्म ने भी कुछ बौद्ध विचारों को अपनाया. बौद्ध और हिन्दू दोनों ने एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान किया और शांति से रहे.

जैन धर्म भी बहुत प्राचीन है. वो भी भारत में ही शुरू हुआ था. जैन धर्म ने, हिंदू और बौद्ध, दोनों धर्मों को प्रभावित किया. प्राचीन जैन धर्म का मानना था कि लोगों को सभी जीवित प्राणियों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि सभी जीवित

प्राणियों में आत्मा होती है. समाप्त